कविताएं
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महके फूल हवायें झूमी
गीत-5 ******* महके फूल हवायें झूमीं फागुन आया क्या? क्या मुस्काई न ई कोपल़ें पुष्पित हुए पलाश. बगिया में मेहमानी करने फिर आया मधुम...
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ग़ज़ल आप की जब दुआ हो गई. दूर सब वेदना हो गई. जिसमें उल्फत के सपने रहे, वो नजर बेवफा हो गई. बढ़ गई मुफलि...
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उतना नीर नहीं बादल में जितना अपनी आँखों में. जीवन सब हीजी लेते हैंसुख सपने उल्लास लिए. थोड़ी सी आशाएं कुछ ,अपनेअधरों पर प्यास लिए. इच्छाएं ऐ...
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ग़ज़ल ******* हंसो हसाओ तो जानूँ. मन बहलाओ तो जानूँ. गजलों की पंखुड़ियों से, रस बरसाओ तो जानूँ. इन पुरजोर हवाओं में दीप ...