महके फूल हवायें झूमी

गीत-5
*******

महके फूल
हवायें झूमीं
फागुन आया क्या?

क्या मुस्काई
न ई कोपल़ें
पुष्पित हुए पलाश.
बगिया में
मेहमानी करने
फिर आया मधुमास.

गली गली में
फिर भंवरों ने
रस बरसाया क्या?

नये पुराने
सम्बन्धों के
आगे पांव बढ़े.
उतर गये
लोगों के शिर से
जो थे भार चढ़े.

आंगन आंगन
फिर खुशियों का
बादल छाया क्या?

भौरे नाचे
डाली डाली
पंछी गाये गान.
प्रीति हृदय की
इक दूजे का
करने लगी बखान.

गीत फागुनी
द्वारे मेरे
तूने गाया क्या?

ऐसी चली
हवाएं जंगल
घाटी     महक गयी.
चेहरे चेहरे
की सबके
खामोशी चहक गयी.

बदली हुई
फिजाओं ने भी
मन  बहलाया क्या?

शिव नारायण शिव
19-3-21

उतना नीर नहीं बादल में जितना अपनी आँखों में

उतना नीर नहीं बादल में जितना अपनी आँखों में.

जीवन सब हीजी लेते हैंसुख सपने उल्लास लिए.
थोड़ी सी आशाएं कुछ ,अपनेअधरों पर प्यास लिए.

इच्छाएं ऐसीउड़ती हैं बगुले जैसे रातों में.

अपनी झूठी मर्यादा के खातिर जीते मरते हैं.
गाँव पड़ोसी मीत हितैषी कहाँ किसी से डरते हैं.

सारा खेल तमाशा अब भी धनवानों के हाथों में.

अहम स्वार्थ में डूबी दुनिया सारी धन की प्यासी है.
मगर गरीबों के चेहरे पर छाई अभी उदासी है.

थोड़े से ही क्षण बाकी हैं अपनी चलती सांसों में.

प्यार करूँ दुलराऊं किसको किसे लगाऊँ सीने से.
मैं तो खुदभी हार गया हूँ अपना जीवन जीने से.

गहरी नींद कहाँ आती है अब अपनों की बाहों में.

कभी न मेरी खुशियों को मुरझाने देती है.

कभी न मेरी खुशियों को मुरझाने देती है.

वाह जिन्दगी कितने स्वप्न सुहाने देती है.

तेरे ही तो संकेतों से तारे जलते हैं.
जब तू चाहे तब ये सूरज चंदा ढलते हैं.

सुख देती है दुख भी किसी बहाने देती है.

तेरे अधर से फूलों की पंखुड़ियाँ झरती हैं.
कभी होठ से निकली बोली आग उगलती है.

किसी तरह तू पग भी नहीं बढ़ाने देती है.

तू हंसती हैं फिर ये मौसम रूप बदलता है.
तू रोती है दिल  पर जैसे आरा चलता है.

फूल न शूलों को ही गले लगाने देती है.

दुनिया से तो संस्कार की बातें करती है.
लेकिन क्यों तू मेरे प्यार की बांह पकड़ती है.

रोता हूँ तो आंसू नहीं बहाने देती है.


किससे मन की बात छुपाऊँ किससे बात करूँ.

किससे मन की बात छुपाऊँ किससे बात करूँ.

इस बस्ती में चेहरे की पहचान नहीं मिलती.
प्यार मुहब्बत अपनों के दरम्यान नहीं मिलती.

किस दिल को अर्पित अपने मन के जज्बात करूँ.

शब्द किसी के और किसी के आंसू छलते है.
दिल के बहुत करीबी भी अब राह बदलते हैं.

किस साथी के आज हवाले अपनी रात करूँ.

जिसको भूख नहीं है उसको थाली मिलती है.
हाथ बढाओ उल्फत के तो गाली मिलती है.

कितना मन मारुं, कितनी छोटी औकात करूँ.

हंसने की इच्छा होती है रोना पड़ता है.
राई हो या पर्वत दुख सुख ढोना पड़ता है.

धूल उड़ाऊ किस घर में किस घर बरसात करूँ.

मेरी खुशियों का इरादा जो किया करती है

ग़ज़ल
****""""
मेरी खुशियों का इरादा जो किया करती है.
जिन्दगी दर्द भी छुप छुप के दिया करती है.

दीन दुखियों से  हमेशा ही घृणा है    करती, 
काश दुनिया ये अमीरों की    दुआ करती है.

जुल्म करके भी बड़े     लोग छूट हैं जाते, 
बेकसूरों  को  अदालत  भी सजा करती है.

ठीक से पांव भी    पड़ते हैं नहीं धरती पर,
इस तरह तेरी   मुहब्बत भी  नशा करती है.

आदमी फर्ज की    राहों से भटक है जाता, 
आखिरी सांस तलक शम्मा जला करती है.

एक दो रोज की ये     बात नहीं है साथी, 
जिंदगी रोज ही   बेखौफ   खता करती है.

जान यह पाया नहीं आज तलक आखिर क्यूँ
देखकर मुझको तेरी आंख दुखा करती है.

पेड़ बन करके छाया करो. पुन्य भी कुछ कमाया करो.

 ग़ज़ल











पेड़ बन  करके छाया करो.

पुन्य भी कुछ कमाया करो.


ये वो धन है जो घटता नहीं, 

प्यार दिल से  लुटाया  करो.


जो अमन  का बने अग्रणी, 

वो   पताका   उठाया करो.


 रोज भगवान   के नाम पर, 

 एक दीपक   जलाया करो.

ठीक से तैरना     सीख लो, 

फिर नदी में    नहाया करो.

कुछ करे भी न खोले जबां, 

सर उसे मत  झुकाया करो.

जो मुहब्बत    का पैगाम दे, 

वो ग़ज़ल    गुनगुनाया करो.

वक्त गुजरे हुए याद करने लगा. अक्स क्या क्या नजर में उभरने लगा.

 ग़ज़ल

वक्त गुजरे हुए   याद    करने    लगा.

अक्स क्या क्या नजर में उभरने लगा.


जाने क्यूँ  हो गया   ये परेशान दिल , 

जब भी उनकी गली से गुजरने लगा.


इस तरह की हवा   चल रही दोस्तों, 

खून का आज  रिश्ता बिखरने लगा.


वो न उल्फत रही  वो न चाहत रही, 

आदमी बात     करने से डरने लगा.


एक लमहा मिला  भी न हंसते हुए, 

हम समझते रहे   दिन संवरने लगा.


वक्त ने भर दिया   यूँ हवा में जहर, 

आदमी   है कि   बेमौत मरने लगा.


पछियों की तरह भी अहम दोस्तों, 

अब जमीं पर मेरा भी उतरने लगा.


शिवनारायण शिव

26-7-21

क्या नहीं मैंने किया दिलको रिझाने के लिए. जिन्दगी को और भी उम्दा बनाने के लिए.

 ग़ज़ल 

क्या नहीं मैंने किया दिलको रिझाने के लिए.

जिन्दगी को     और भी उम्दा बनाने के लिए.


आइये मिलकर कोई   ईजाद अब रस्ता करें, 

दोस्तों फिर वक्त की सूरत  सजाने   के लिए.


जब मेरी कुछ बात   पर नाराज़गी  होने लगी, 

चुप जबां को कर लिया रिश्ता बचाने के लिए.


जिसने उल्फत पे मेरी कुछ गौर फरमाया नहीं, 

दिल तड़पता क्यूँ  है उसके  पास जाने के लिए.


आदमी बेताब    है खुद के   गमों के बोझ से, 

कौन आता है किसी का दुख मिटाने के लिए.


नीर वाले मेघ तो      बरसात  करते हैं  कहीं, 

मेघ आते हैं इधर      बिजली गिराने के लिए.


मैं बहुत दिन की खुशी की ख्वाहिशें रखता नहीं, 

एक पल   मुझको भी चहिये मुस्कराने के लिए.


शिव नारायण शिव

26-7-21

यूँ तेरा आना जाना हुआ. घर का मौसम सुहाना हुआ.

 ग़ज़ल

******"

यूँ तेरा    आना जाना हुआ.

घर का मौसम सुहाना हुआ.


चोट जिसने     बराबर दिये,

दिल उसी का दिवाना हुआ.


दोस्ती दुश्मनी    गम खुशी, 

ये तो किस्सा   पुराना हुआ.


प्रश्न जब  भी उठे   भूख के, 

किस अदा  से बहाना हुआ.


प्यार उल्फत का अब दोस्तों, 

आज  खाली   खजाना हुआ.


मेघ  पत्थर       बरसने लगे, 

जब भी घर   से रवाना हुआ.


जिस्म   क्यूँ   थरथराने लगा, 

आइना   जब    उठाना हुआ.


शिव नारायण शिव

28-7-21

दिल मचलने लगा आप को देखकर. दीप जलने लगा आप को देखकर.

 ग़ज़ल

*******

दिल मचलने लगा आप को देखकर.

दीप जलने    लगा आप को देखकर.


 हर कली बाग   की मुस्कराने लगी, 

फूल खिलने लगा  आप को देखकर.


था अंधेरा अभी तक तो छाया हुआ, 

दिन निकलने लगा आप को देखकर.


वो जिगर जिसमें अंकुर निकलते न थे, 

प्यार पलने लगा    आप को  देखकर.


दोकदम जिसको चलनाभी मुश्किल रहा, 

वो    उछलने लगा   आप को   देखकर.


एक मंजर जो   दिल को न भाया कभी, 

रुख बदलने लगा      आप  को देखकर.


दर्द पत्थर हुआ      था जिगर     का मेरे, 

अब पिघलने लगा      आप को देखकर.


शिव नारायण शिव

29-7-21

वो भी यूँ याद करते रहे. हम जहन से उतरते रहे.

 ग़ज़ल

*******

वो भी यूँ      याद करते रहे.

हम जहन   से उतरते    रहे.


दिल उसी  का हुआ आश्ना, 

जो   मुहब्बत   से डरते रहे.


फूल शाखों पे  महफूज थे, 

हाथ आये       बिखरते रहे.


और चेहरा    बिगड़ता गया, 

जिन्दगी      भर संवरते रहे.


मुफलिसी में भी जानें गयी, 

लोग खाकर   भी मरते रहे.


नफरतों की यूँ  बारिस हुई, 

दिल के   तालाब भरते रहे.


संग दिल आदमी था मगर, 

प्यार होठों      से झरते रहे.


शिव नारायण शिव

1-8-21

हाथ बढ़कर मिलाया किसी ने नहीं. डूबते को बचाया किसी ने नहीं.

 ग़ज़ल

*******

हाथ बढ़कर मिलाया किसी ने नहीं.

डूबते को       बचाया किसी ने नहीं.


वो  गिरा था   उठाया   किसी ने नहीं.

उसको अपना बनाया  किसी ने नहीं.


इक मुहब्बत का ही मैं  तलबगार था, 

प्यास लब की बुझाया  किसी ने  नहीं.


अजनबी     राह पे मैं     भटकता रहा, 

राह मुझको     दिखाया किसी ने नहीं,


दर्द देने   की कोशिश  में दुनिया रही, 

एक पल भी    हंसाया किसी ने नहीं, 


वो अंधेरा       जमाने से   मौजूद है, 

एक दीपक    जलाया किसी ने नहीं.


जिस सलीके से सुनने की चाहत रही, 

उस तरह  गुनगुनाया     किसी ने नहीं.


शिव नारायण शिव

11-8-21

कुछ दिन अपने दिल में रख. फिर मसला महफ़िल में रख

 ग़ज़ल

--------

कुछ दिन अपने दिल में रख. 

फिर मसला महफ़िल में रख. 


कदम    उठाने   से     पहले, 

ध्यान सदा     मंजिल में रख. 


कभी    दगा     दे सकता है, 

मत यकीन   कातिल में रख, 


तूफां    आने     वाला     है, 

कश्ती को    साहिल में रख. 


अहतियात    हो   कदमों में, 

जितना   मुस्तकबिल में रख. 


ये  मुफलिस     की बस्ती है, 

कुछ पैसे     फाजिल में रख. 


किससे कम   लिखता है तू, 

खुद को भी आलिम में रख. 


शिव नारायण शिव

14-8-21

खुशियों का उपवन दिखता है, अव्वल मेरा वतन दिखता है .

 ग़ज़ल

******

खुशियों का उपवन दिखता है, 

अव्वल मेरा वतन  दिखता   है . 


हाथों में    लेकर       तो देखो, 

सोने सा कण-कण दिखता है.


जन जन की जीवन- शैली में, 

वेदों    का    दर्शन दिखता है.


हर सरिता में    गंगा जमुना, 

घर घर वृन्दावन   दिखता है.


प्यार मुहब्बत  की हरियाली, 

देश मेरा  सावन   दिखता है.


हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई, 

सबमें अपनापन   दिखता है.


एक एक  शै   में  उल्फत का, 

अद्भुत   आकर्षण दिखता है.


दुनिया के इस मानचित्र पर, 

भारत नम्बर वन दिखता है.


शिव नारायण शिव

15-8-21

अच्छी फिजा बनाकर रखिये. घर आंगन महका कर रखिये,

 ग़ज़ल

*******

अच्छी फिजा   बनाकर रखिये.

घर आंगन    महका कर रखिये, 


पत्थर दिल     वाली दुनिया  है, 

दिल का जख्म छुपा कर रखिये.


हिला न   पाये     आंधी घर को, 

यूँ   दीवार      उठाकर    रखिये.


घर आंगन में    भारत माँ   की, 

मूरत एक       सजाकर रखिये.


सुख में दुख  में     हर सूरत में, 

मन अपना   बहला कर रखिये.


मंजिल की      चाहत रखते हैं, 

हर दम कदम बढ़ा कर रखिये.


हवा    विषैली      है बाहर की, 

बच्चों को   फुसला कर रखिये.


शिव नारायण शिव

18-8-21

ग़ज़ल(देश प्रेम डूबी हुई)

 ग़ज़ल(देश प्रेम डूबी हुई) 

*******

आजादी        का   नारा है.

अनुपम      देश    हमारा है.


कोना कोना      धरती का, 

कितना   प्यारा     प्यारा है.


जिससे ज्योतित    है दुनिया, 

भारत     वह ध्रुव     तारा है.


दुश्मन हो     जाये  अवगत, 

हर      बच्चा     अंगारा   है, 


पांव    जहाँ  हम   हैं  रखते, 

हो    जाता      उजियारा है, 


सबने  खून         पसीने से, 

इसका         रूप संवारा है.


यही     हमारी       है जन्नत, 

यह    ही  भाग्य    हमारा है.


शिव नारायण शिव

19-8-21

आप की जब दुआ हो गई. दूर सब वेदना हो गई.

ग़ज़ल

आप की    जब दुआ   हो गई. 

दूर     सब        वेदना  हो गई. 


जिसमें उल्फत के    सपने रहे, 

वो          नजर  बेवफा हो गई. 


बढ़ गई   मुफलिसी इस तरह, 

मुख्तसर   योजना       हो गई. 


पेड़       सूखे      हरे  हो गये, 

जब मेहरबां      घटा   हो गई. 

 

बाढ़ आई     गई भी      चली, 

रेत घर में      जमा      हो गई. 


आप का   आगमन क्या हुआ, 

ये सुहानी            हवा हो गई. 


बदसलूकी         उधर भी हुई, 

कुछ इधर       से खता हो गई. 


शिव नारायण शिव

19-8-21

खुद भी हंसना न पराये को हंसाना आया. कितना कमबख्त मेरे दोस्त जमाना आया,

 ग़ज़ल

***********

खुद भी हंसना  न पराये को हंसाना आया.

कितना कमबख्त मेरे दोस्त जमाना आया, 


बाद मुश्किल के गये रात बहुत आंख लगी, 

ख्वाब आया तो लिए गम का फसानाआया.


आदमीयत की वो     तालीम दिया करते हैं, 

द्वेष अपने न   जिन्हें घर का मिटाना  आया.


 उस तरह इल्म तोआया न उन्हें उल्फत का, 

जिस तरह उनको मेरा जख्म दुखाना आया.


धूप में   कतरे      लहू के भी  सुखाये हमने, 

जिन्दगी फिर भीअभी तक न सजाना आया.


बात ही   बात में     हम हाथ   उठा   देते हैं, 

सर मगर अपने   बड़ों को न झुकाना आया.


यूँ तो कर डाले हैं रौशन भी जहाँ को लेकिन, 

एक दीपक     न मुहब्बत का जलाना आया.


शिव नारायण शिव

23-8-21

फूल छुओ तो ख़ार लगे है. जहर सरीखा प्यार लगे है.

 ग़ज़ल

*******

फूल छुओ तो ख़ार लगे है.

जहर सरीखा प्यार लगे है.


गली   गली  रस्ते रस्ते पर. 

खतरों का  अम्बार लगे है.


झूठ   बोलती    है सच्चाई, 

लफ्ज़ लफ्ज़ अंगार लगे है.


माननीय की   सभा हमारे, 

कौओं का   दरबार लगे है.


पूजा घर     का आजू-बाजू, 

मछली  का    बाजार लगे है.


कोई     है   आंसू     में डूबा, 

और कोई       बीमार लगे है.


जिश्म तेरा पंखुड़ी कमल की, 

रूप तेरा        कचनार लगे है.


शिव नारायण शिव

26-8-21

व्यर्थ सभी तदबीर हुई है | यूँ अपनी तकदीर हुई है ||

 ग़ज़ल

*******

व्यर्थ सभी तदबीर     हुई है.

यूँ अपनी    तकदीर   हुई है.


लूट     रहे सब   दोनों हाथों, 

खतरे     में     जागीर हुई है.


रोज हुई गर     साफ सफाई, 

क्यूँ  धूमिल      तस्वीर हुई है, 


पहले से   सच है कि   छोटी, 

उल्फत की      जंजीर  हुई है.


पड़ी बहुत है     गुड़ की भेली, 

फिर  भी  कड़वी   खीर हुई है.


है गजलों     का दौर चला यूँ, 

दुनिया      गालिब मीर हुई है.


आज मेरे दिल के शायर की, 

हर झूठी         तहरीर हुई है.


शिव नारायण शिव

27-8-21

महके फूल हवायें झूमी

गीत-5 ******* महके फूल हवायें झूमीं फागुन आया क्या? क्या मुस्काई न ई कोपल़ें पुष्पित हुए पलाश. बगिया में मेहमानी करने फिर आया मधुम...